बोलती हैं तस्वीरें
सिर्फ़ दो पंक्तियों के माध्यम से सम्बंधित चित्र को जीवंत बनाने की एक कोशिश.
रविवार, अक्टूबर 09, 2011
अजगर नेता
सोने की चिड़िया अगर, मुल्क पुनः कहलाय !
हर नेता अजगर बनै, निगल उसे यूं जाय !!
नेता, कउए, गिद्ध !!
सारे प्राणी जानते, नेता, कउए, गिद्ध !
"घर का जोगी जोगिया, अन्य गाँव का सिद्ध !!"
अश्वमुखी बीवी की करवट
अपनी किस्मत को चादर में, मुंह ढककर ही रोता होगा !
अश्वमुखी बीवी हो जिसकी, किस करवट को सोता होगा ??
हंसने में भी कंजूसी
मेरे पापा हंसने में भी, तो कंजूसी करते हैं !
करके हंसी, दिखानी हो तो, ऐसे मुंह सी करते हैं !!
पड़ोसन का अहसास
जब भी कभी पड़ोसन हमसे, मिलने को घर आती है !
जो अहसास हमें मिलने थे, बेटे को दे जाती है !!
रस्तों की दुश्वारियां
रस्तों की दुश्वारियां, क्या देखें हम, यार ?
सफ़र शेष जितना रहा, होगा वह दुश्वार !!
खेती को जगह
जब खेती को, जगह नहीं मिल पाएगी !
तो फिर खेती, कहां कराई जायेगी ??
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