बोलती हैं तस्वीरें
सिर्फ़ दो पंक्तियों के माध्यम से सम्बंधित चित्र को जीवंत बनाने की एक कोशिश.
रविवार, अक्टूबर 09, 2011
दीवाली में अली छिपे हैं
भइयों को लड़वाने वाले, इतना रक्खें ध्यान में !
दीवाली में अली छिपे हैं, राम छिपे रमजान में !!
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