बोलती हैं तस्वीरें
सिर्फ़ दो पंक्तियों के माध्यम से सम्बंधित चित्र को जीवंत बनाने की एक कोशिश.
शनिवार, अक्टूबर 08, 2011
ज़हन्नुम में चलेंगे
पता क्या है कि ज़न्नत में, क्या नज़्ज़ारे मिलेंगे ?
ज़हन्नुम में चलेंगे, दोस्त भी सारे मिलेंगे !!
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें