बोलती हैं तस्वीरें
सिर्फ़ दो पंक्तियों के माध्यम से सम्बंधित चित्र को जीवंत बनाने की एक कोशिश.
शुक्रवार, अक्टूबर 07, 2011
हौंसले
आँधियाँ हैं, मगर जले देखो !
एक शम्मा के, हौंसले देखो !!
1 टिप्पणी:
Udan Tashtari
8 अक्टूबर 2011 को 5:12 am बजे
बहुत खूब...
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